शनिवार, 12 दिसंबर 2009

जब शब्द कम पड़ जाते हैं....

जिसने कभी कहा कि एक तस्वीर हजारों शब्दों से बढ़कर होती है वो ज़रूर एक ऐसा आलसी लेखक होगा जो एक लम्बी यात्रा पर गया और बहुत सारी फ़ोटो खीचीं। वापिस आने के बाद लिखने बैठा तो समझ नहीं पाया कि क्या क्या लिखे और सोचा चलो बस फ़ोटो ही दिखा दो!

इसलिए अब ज़्यादा बातें बनाये बिना सीधे सीधे मेरी १० दिन की कोलकाता-न्यू जलपाईगुड़ी-दार्जिलिंग-माने भंजन-धोत्रे-टुन्ग्लू-टुम्लिंग-काली पोखरी-संदकफू-गुर्दूम-रिम्बिक-दार्जिलिंग-कोलकाता यात्रा के फ़ोटो संग्रह










गुरुवार, 22 अक्तूबर 2009

राहुल महाजन का स्वयंवर

(मेरी इसी शीर्षक की अंग्रेज़ी पोस्ट का हिन्दी अनुवाद किया मेरी मित्र मेघना ने। ये पोस्ट उन्हीं के शब्दों में!)

सरकार आर्थिक मंदी को गंभीर मुद्दा मान रही है या नहीं ये भले ही चर्चा का विषय हो पर NDTV इमेजिन पर कुछ बुद्ध्जीविओं ने लैंगिक समता को ज़रूर ही प्रमुख मुद्दा बना लिया है ..

ये कुछ इस प्रकार है NDTV इमेजिन ने राखी के स्वयंवर के बाद जिस में तकरीबन एक दर्ज़न ऐसे पुरूष जो निश्चित रूप से रेड एंड व्हाइट वीरता पुरस्कार के लिए नामांकित किए जाने चाहिए सिर्फ़ अगर ये किसी येल्लो एंड ब्लैक मूर्खता पुरस्कार के लिए न नामांकित हो , अब हमारे समक्ष कुछ एक दर्ज़न ऐसी ही वीरांगनाओं को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है ..

और वैसे भी समानता की इस दौड़ में अकेले पुरुषों को ही ख़ुद को मूर्ख साबित करने का अधिकार क्यूँ प्राप्त हो ॥ सस्ती शोहरत के पीछे भागने वाली महिलाओं को भी एक पूर्व ड्रग एडिक्ट से दिल का रिश्ता जोड़ने के समान अवसर मिलने चाहिए .. इस पर अगर आप तर्क दें की उसने ये आदत छोड़ दी है तो भी हम उसके अपनी पत्नी को पीटने और छोड़ देने को कैसे नज़रंदाज़ कर दें ..

मैं इन कयासों में नहीं उलझना चाहता की अपने दूसरे चरण में ये शो पहले के मुकाबले कितना सफल या असफल होगा पर शायद राखी का कोई पुरूष संस्करण है तो वो महाजन ही हैं ॥ अतः भारत की वीरांगनाओं आपके पास सुनहरा मौका है ये साबित करने का की आपमें घटिया शोहरत की कितनी भूख है … उम्मीद है आप हमारे अनुमानों से कहीं आगे होंगी .

गुरुवार, 27 अगस्त 2009

ग्लोबल वार्मिंग

अब बारिश में
मेढक नहीं टरटराते।
रातों में जुगनू नहीं
जगमगाते.
आसमान भी अब स्लेटी सा है,
तारे भी नहीं दिखते अब
टिमटिमाते॥

अब पानी पड़ने पर
मिटटी नहीं महकती।
अब बालकनी में
सुबह गौरैया नहीं चहकती।

अब सर्दी
बस सर्दियों की छुट्टियों
जितनी होती है।
और गर्मी की छुट्टियाँ
गर्मियों का कोना पकड़
के रोती हैं।

अब पहाडों पर
बर्फ की चादर नहीं
बर्फ का रूमाल होता है,
ग्लोबल वार्मिंग का नहीं
आदमी के लालच का
ये कमाल होता है!

बुधवार, 12 अगस्त 2009

बदली

मद्धम स्लेटी,
कितने सारे बादल
छाये हैं।
अद्भुत
मेरे सतरंगी सपने
सब एक रंग में
ही आए हैं!

मद्धम स्लेटी से
उन बादलों में,
खोजता हूँ
तुम्हारा चेहरा।
वो शायद नाक है वहाँ
और वो शायद आँखें
जहाँ रंग है गहरा।।

तस्वीर तुम्हारी ये हर पल
बनती है, बिगड़ती है
सुधरती है,
संवरती है।
शायद वैसे ही जैसे,
मेरे मन में
हर पल एक नयी
छवि तुम्हारी
घर करती है।।

आँखें बंद करुँ
सोचूँ तुम्हें,
पर हंस देती हो तुम
जैसे ही पास आती हो।
क्यूँ तंग करती हो,
हर बार
सब रंग
बिखेर जाती हो!

वहाँ नभ में भी
यही चला करता है
तंग करना
हँसना, खेलना।
मत सताओ,
शायद यही कहते
होंगे हवा से
ये मेघ ना!

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

माया का स्वयंवर

आम दिनों की तरह उस दिन भी करीब २६२७८ आई ए एस, आई पी एस, आई सी एस, आई एफ़ एस, पी सी एस, टी सी एस, एम एन एस वगैरह के तबादले करने और अपनी ६४८२३६ और कांशीराम की २ मूर्तियों की स्थापना के आदेश देने के बाद बहनजी को लगा कि एस पी, कांग्रेस, बी जे पी, आर जे डी, बी जे डी, आई एन एल डी, यू पी ए, एन डी ए, आई आर ए और देश विदेश की २३४७४७ पार्टियों की दिन रात की साजिशों से बचने और उनको मुंह तोड़ जवाब देने में उनको एक जीवन साथी की ज़रूरत है।

बहन जी ने आधुनिक भारत की एक अन्य वीरांगना (एक तो वो ख़ुद हैं ही) राखी सावंत से प्रेरणा लेते हुए, अपना स्वयंवर आयोजित करने की घोषणा कर दी।

बी एस पी ने इस दिन को 'शादी करो दिवस' के रूप में मनाने के निर्णय किया तो विपक्ष ने इसे 'सरकार को तलाक़ दो दिवस' के रूप में मनाया। तलाक़ के केस लड़ने वाले वकीलों ने विपक्ष की सराहना की तो विवाह के कारोबार से जुड़े उद्यमियों ने मायावती के शादी करने के निर्णय को देश की युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श की संज्ञा दी। लेकिन उनका उत्साह तब ठंडा पड़ गया जब मायावती ने उनसे ज़्यादा बकवास न करने और तुंरत ४० करोड़ रुपये के चेक भेज देने के लिए कहा।

राज्य के बी एस पी सांसदों और विधायकों को अपने अपने क्षेत्रों से नकद राशि जमा करने के आदेश दिए गए विपक्ष ने शोर मचाया कि सरकार जनता से ज़बरन वसूली कर रही है, लेकिन सतीश चंद्र मिश्रा ने मीडिया को समझाया कि जनता अपनी प्रिय मुख्यमंत्री को शगुन देना चाहती है और सरकार ऐसा करने में उनकी मदद कर रही है। उन्होंने ये भी कहा सभी नकद 'उपहार' आयकर से मुक्त होंगे, लेकिन उनके इस प्रस्ताव को आयकर विभाग ने खारिज कर दिया। इस पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि ये एक और प्रमाण है कि कांग्रेस उनकी हत्या करना चाहती है, दलितों का अपमान कर रही है और उत्तर प्रदेश के विकास में रोड़े अटका रही है.

आंबेडकर पार्क को सर्वसम्मति से स्वयंवर स्थल के लिए चुन लिया गया लेकिन क्यूंकि वहाँ कोई निवास स्थान नहीं है, इसलिए पी डब्लू डी को नजदीकी हॉस्टल को तोड़ कर होटल बनाने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका का जवाब देते हुए सरकार ने सफाई दी कि यह सरकारी खजाने का दुरुपयोग नहीं है बल्कि स्वयंवर के प्रचार और प्रसारण से जो धन एकत्रित होगा उससे मायावती की और बहुत सारी मूर्तियाँ लगाई जाएंगी जो राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देंगी। राज्य सरकार की तरफ़ से एक फ्रांसीसी मूर्तिकार ने बयान दिया कि मायावती की मूर्तियाँ बेहद लोकप्रिय हो रही हैं और बहुत ही जल्दी मोनालिसा को भी पीछे छोड़ देंगी।

सारी तैयारियों के बावजूद निर्धारित दिन स्वयंवर स्थल पर एक भी दूल्हे के नहीं पहुँचने से जहाँ चैनल, सरकार और मायावती की काफ़ी फजीहत हुई, वहीँ विपक्ष और मीडिया को सरकार की खिचाई करने का काफ़ी मसाला मिल गया।

इस पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस उनकी हत्या करना चाहती है, दलितों का अपमान कर रही है और उत्तर प्रदेश के विकास में रोड़े अटका रही है। सरकार ने मामले की जांच के लिए सी बी आई को आदेश दे दिए हैं। वैसे जानकारों की मानें तो असल वजह थी स्वयंवर के नियम जिनके मुताबिक जिसे भी मायावती नापसंद करेंगी उसके विरुद्ध दलित उत्पीड़न एक्ट के अर्न्तगत गैर-ज़मानती वारंट जारी कर दिए जाएंगे और उसके घर को आग लगा दी जाएगी।

( यह पोस्ट अंग्रेज़ी में पढ़ें यहाँ )

शुक्रवार, 26 जून 2009

सीखना सिखाना

कल कनुप्रिया को पिंग किया, उनकी माता जी के ब्लॉग का लिंक पूछने के लिए। इस माँ बेटी की जोड़ी की कहानी अपने आप में प्रेरणास्पद है.

एक हादसे में परिवार के एक सदस्य के असमय निधन के बाद जब आंटी की हिम्मत टूटने लगी थी, कनुप्रिया ने उनको एक बार फ़िर एक दिशा दी। उनको कंप्यूटर का इस्तेमाल कर के हिन्दी में लिखना सिखाया। शुरू में तो थोड़ा विरोध था,"क्या होगा लिख के" और "रहने दो... मुझे कुछ नहीं सीखना है" जैसी बातें, लेकिन जब एक इन्टरनेट पत्रिका में २ कविताएँ छप गयीं, तो यह शुरूआती बैरियर हट गया। (इसके बारे में पढ़िये कनुप्रिया की लेखनी में!)

आंटी ने न सिर्फ़ हिन्दी में लिखना सीखा, अब उनका अपना ब्लॉग भी है।

तो बस यही कह रहा था में कनुप्रिया से कि आंटी की तारीफ़ करनी पड़ेगी कि उनमें सीखने का उत्साह है। इतनी जटिल चीज़ सीख रही हैं। एक मेरे पिता जी हैं कि उनको मोबाइल में एड्रेस बुक तक यूज़ करना नहीं आता, इतनी बार सिखाने की कोशिश की लेकिन वो सीखना ही नहीं चाहते।

तभी ये बात दिमाग में आयी, कि आज हम अपने माँ-बाप के बारे में वही कह रहे हैं जो कल कुछ साल पहले तक वो हमसे कहा करते थे "राहुल को देखो कितनी मेहनत करता है, और तुम हो बिल्कुल कोशिश भी नहीं करते हो।" कोशिश नहीं करोगे तो कैसे सीखोगे!"वगैरह वगैरह ...

वक़्त कैसे बदल जाता है न! आज हम जहाँ हैं, कल वहाँ हमारे माता-पिता थे और कल हमारे बच्चे होंगे। कल हमने जो कुछ सीखा था, कल हमसे कोई और सीखेगा और हम किसी और से कुछ और सीखेंगे!

और बस ज़िन्दगी का ये क्रम यूँ ही चलता रहेगा!

गुरुवार, 25 जून 2009

वर्षा जल संग्रहण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करने की विधि

अभी कुछ महीने पहले अपनी कंपनी और स्वयंसेवी संस्था प्रेमालयम के साथ मिलकर, हैदराबाद के एक प्राइमरी स्कूल में एक मध्यम क्षमता का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया। इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है, निर्माण का तरीका और कितना खर्चा आता है इसकी पूरी जानकारी मैंने अपने ब्लॉग के ज़रिये देने की कोशिश की है।
ये पोस्ट आप यहाँ (अंग्रेज़ी) देख सकते हैं। कोई और जानकारी चाहें तो भी बेहिचक पूछियेगा!

शनिवार, 16 मई 2009

चुनाव परिणाम : जवाब के बाद अब सवाल

समय: १२.३७ अपरान्ह, १६ मई २००९

५४३ सीटों के नतीजे और रुझान आ चुके हैं और लगभग सब ने मान लिया है कि फ़िर से 'सिंह इज किंग'। अब मेरे दिमाग में कुछ सवाल आने शुरू हो गए हैं:

१) मायावती का क्या होगा? उत्तर प्रदेश में अब वो हस्ती नहीं रही बहन जी की। कांग्रेस और एस.पी. ने बी.एस.पी. को झटका दिया है। मायावती के प्रधान मंत्री बनने के सपने अब उत्तर प्रदेश के सहारे तो पूरे होने से रहे। बाकी राज्यों में अभी भी हैसियत 'स्पॉयलर' से ज़्यादा नहीं है। तो अब बहन जी का राजनैतिक कद कितना बढ़ेगा या घटेगा?

२) बी.जे.पी. क्या फ़िर से २००४ वाली हालत में चली जाएगी? २००४ में हार ने पार्टी का आत्मविश्वास लगभग ख़त्म कर दिया था और अगले ३ साल तक वो इस सदमे से उबार नहीं पायी। इस बार तो और भी बुरा प्रदर्शन रहा है और अब तो आडवानी भी शायद इस्तीफा दे देंगे। तो अब बी.जे.पी. की दूसरी पंक्ति के नेता पार्टी को किस और ले जाएंगे?

३) क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का पुनर्जन्म होगा? या ये सिर्फ़ एक चमक भर है? कांग्रेस ने कल्पना से भी बेहतर नतीजे दिए हैं यू पी में। क्या कांग्रेस इस जीत का फायदा उठा सकेगी या फ़िर एक बार फ़िर अच्छी शुरुआत को गँवा देगी?

४) आडवाणी जी का क्या होगा? क्या आडवाणी शेन वार्न बन गए हैं जिनके लिए कहा जाता है कि वो ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ कप्तान थे जिसने कभी कप्तानी नहीं की? और कितने साल वो सक्रिय राजनीति में रहेंगे?

अगर आपको जवाब मालूम हैं तो कृपया बताइये!

(देखिये मेरी 'मिलिनेयर टू स्लमडॉग' लिस्ट यहाँ)

मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

उम्मीद

" कल सुबह बहुत अच्छी होगी। कल सुबह सब ठीक हो जाएगा! "
- श्रीमती किरन सिन्धु

ज़रा सी दो लाइनें दिल छू गयीं। शायद इसी लिए कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया है!

(कनुप्रिया के ब्लॉग से साभार)

सोमवार, 30 मार्च 2009

क्या मीडिया वाकई पक्षपाती है?

एन डी टी वी इंडिया पर एक चर्चा में अगर ज़िक्र नहीं आता तो मुझे तो शायद इस घटना का पता भी नहीं चलता। (मालूम नही कि आपको पता है कि नहीं!) चुनाव आयोग ने कोंग्रेस के इमरान किदवई को एक चुनाव सभा में धार्मिक मुद्दे पर बोलने के लिए नोटिस जारी किया है। किदवई साहब ने इस भाषण में कहा कि अगर वो मुफ्ती होते तो फतवा जारी कर देते कि मुस्लिमों के लिए बी जे पी को वोट देना 'कुफ्र' के बराबर है।

मुझे आश्चर्य है कि इस घटना को मीडिया ने लगभग नज़रंदाज़ कर दिया है। हलाँकि व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि यह भाषण वरुण गाँधी के भाषण के मुकाबले कुछ भी नहीं है और न इसमे किसी अन्य धर्म के विरुद्ध कोई बात कही गयी है और सबसे बड़ी बात किदवई साहब के नाम में 'गांधी' नहीं है! लेकिन कोई भी दलील इस बात को नहीं झुठला सकती कि मीडिया ने इमरान किदवई और कोंग्रेस को लगभग क्लीन चिट दे दी है।

ये बात छोटी लग सकती है लेकिन फ़िर मीडिया हिन्दुओं के विरूद्ध पक्षपात के आरोपों से बच नहीं सकता।

शनिवार, 21 मार्च 2009

जैसे हम, वैसे हमारे नेता

चलो अब मेनका गांधी खुश होंगी। इतने साल से बेटे का कैरियर बनाने में लगी थीं, कुछ हो नहीं रहा था। कोई नाम तक नहीं जानता था।

लेकिन अब घर घर में बेटा चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। राजनीति में सही तरीके से अब पदार्पण हुआ है। भड़काऊ भाषण बाज़ी, पकड़े जाने पर झूठ बोलना और फ़िर हिंदुत्व का सहारा लेकर ख़ुद को बेक़सूर साबित करना। बी जे पी के पास इतने दिन से कोई युवा नेता नहीं था, चलो अब एक तो मिल गया।

टी.वी चैनल भले ही भाषण पर आँखें तरेर रहे हों लेकिन, लगातार कवरेज़ कर के उन्होंने एक और नरेन्द्र मोदी पैदा कर दिया। अभी ही हिंदुस्तान टाइम्स में पढ़ा कि पीलीभीत की जनता का ध्रुवीकरण (पोलराईजेशन) हो चुका है, जैसे मोदी साहब ने गुजरात का किया है। ibnpolitics.com पर एक समय जहाँ इन 'नेता जी' का प्रोफाइल तक नहीं था, अब ५०००० से ज़्यादा लोगों ने उनको वोट किया है (लगभग २५००० उनको पसंद करते हैं और लगभग १६००० नापसंद)। शायद यही वजह थी कि पहले तो हो-हल्ले से घबरा कर पार्टी ने ख़ुद को भाषण और भाषण देने वाले से अलग रखने की कोशिश की लेकिन वो बहुत जल्दी समझ गए कि 'बदनाम भी होंगे तो क्या नाम न होगा' और तुरंत ही इन श्रीमान को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया!

जो लोग इनको पसंद करते हैं वो इनके भाषण को भूल कर इनकी प्रेस कांफ्रेंस में कही गयी बातों को तवज्जो देते हैं। ये हिंदू हैं, भारतीय हैं और गांधी हैं। सबसे बड़ी बात कि नेता हैं। इनकी कही हर बात को सुनाने दिखने के लिए १५० चैनल और ५० अखबार हैं और बेवकूफ बनकर आपस में लड़ मरने के लिए ११० करोड़ हिन्दुस्तानी। अभी ४ महीने पहले ही २६/११ के बाद हम सबने कसमें खाई थीं कि अब जाति-धर्म नाम पर नहीं लडेंगे, एक रहेंगे और ऐसे नेताओं को और ऐसी बंटवारे की राजनीति को ख़त्म करेंगे। और अब हम 'पढ़े-लिखे' कल्चर्ड लोग फ़िर से कठपुतली बन कर नाचने को तैयार हैं।

किस मुंह से नेताओं को गाली देते हैं हम जब हम ख़ुद ही ऐसी दोगली बातें करते हैं।

नेता जी की जेल यात्रा: बेल की अर्जी, शहादत का अंदाज़!

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

वैलेंटाइन डे और प्रमोद मुतालिक के बन्दर!

अब तक आपने 'पिंक चड्ढी कैम्पेन' के बारे में तो सुना/पढ़ा होगा ही, कईयों ने तो कुछ पिंक न सही लाल पीली भेज भी दी होंगी। आज पता चला कि श्री राम सेना चड्डियों के बदले साड़ियाँ भेज रही है।

मैं तो कहता हूँ कि इस साल ५-६ बार वैलेंटाइन डे मना लेते हैं, देश का ज़बरदस्त तरीके से भला होगा! कैसे?

अब देखो देश भर में राम सेना के लिए अंतर्वस्त्र खरीदे जाएंगे, हजारों की संख्या में। राम सेना साड़ियाँ खरीदेगी, फ़िर से हजारों की संख्या में। टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग के हुए न वारे न्यारे! अब ये सब सामान भेजा जाना है तो उसके लिए कुरियर कंपनियों की ज़रूरत पड़ेगी। इतना सामान, सोचो कितना पैसा!

ये तो हुआ डाइरेक्ट वाला फायदा, इनडाइरेक्ट वाला और भी लंबे समय तक चलने वाला है।

श्री राम सेना ने कहा कि अगर जोड़ों को पकड़ा गया तो शादी करा देंगे। शादी तो इस देश का सबसे बड़ा रिसेशन प्रूफ़ धंधा है। २ लोग शादी करते हैं, २००० लोगों की रोजी चलती है! (वैसे कहीं ये शादी वाला एंगल शादी बिजनेस वालों के कहे पर तो नहीं लाया गया है? देखना पड़ेगा।) लेकिन मैरेज ब्यूरो और शादी वाली वेबसाइट्स के पेट पर तो लात पड़ेगी।

वैसे एक ज़बरदस्त आईडिया। अगर आपका परिवार आपकी प्रेमिका या प्रेमी को पसंद नहीं करता और आपके 'बाबूजी' ने कह दिया है कि "उस घर में तेरी डोली (या तेरी घोड़ी!) उनकी लाश पर ही चल कर जाएगी" तो इस दिन बिंदास अपने प्रेमी/प्रेमिका के साथ निकल जाइए और पूरी कोशिश कीजिये कि आप इन बंदरों, मेरा मतलब है राम सैनिकों (अब राम की सेना में तो बन्दर ही थे न) की नज़र में आ जाइए। बस बाबूजी की लाश का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं!

(वैसे प्रमोद मुतालिक और उनके बन्दर किसी जंगल में ही रहें तो बेहतर है। न तो हमारे शहरों में इनके लिए जगह हो और न ही हमारे मन में!)

पढ़ें मंगलौर घटना के असली हीरो के बारे में। क्या आप पवन शेट्टी को जानते हैं?

बुधवार, 21 जनवरी 2009

मेरी पहली फ़िल्म: यू, मी एंड डीवाईपीसी

बचपन से ही फ़िल्म डाइरेक्टर बनने का ख्वाब था, जो सिर्फ़ ख्वाब ही रहा। टाटा इंडिकॉम का ऐड देखा 'सुनो दिल की आवाज़'। सो मैंने सोचा दिल की आवाज़ सुनने का इससे अच्छा टाइम नहीं मिलेगा, रिसेशन का ज़माना है, कल को कंपनी निकाल दे तो कुछ तो और ऑप्शन रहना चाहिए न। सो जी मैं बन गया डाइरेक्टर! और प्रोड्यूसर, और राइटर, और कैमरा मैन , और एडिटर और वगैरह वगैरह...

वापिस ज़मीन पर आ जाओ। कुछ समय पहले आपको एक नयी साइट के बारे में बताया था न, DonateYourPC.in, तो उसी के प्रमोशन के लिए ये छोटा सा विडियो अपने ऑफिस के साथियों की मदद से बनाया। एक नज़र देखिये और अपनी राय ज़रूर दीजियेगा।

रविवार, 11 जनवरी 2009

ऐसे ठगता है रिलायंस फ्रेश!

दो-तीन दिन पहले अपने नजदीकी रिलायंस फ्रेश स्टोर में सब्जी लेने गया था। और वहाँ पर पैक्ड गोभी के एक पैकेट पर नज़र पड़ी और ठहर गयी। २ और पैकेट पड़े थे उनको भी उठाकर देखा और सारा खेल समझ में आ गया।
हर पैकेट पर लगे लेबल को इस तरह से फाड़ दिया गया था कि उसकी 'बेस्ट बिफ़ोर डेट' (यानी कब तक प्रयोग के लिए सुरक्षित है) नहीं पढ़ी जा सके। मैंने उसी समय कुछ फ़ोटो खीच लिए:

स्वयं ही देखिये। मैंने स्टोर के स्टाफ से इस बारे में पूछा लेकिन उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। वैसे भी रिलायंस फ्रेश में कस्टमर केयर (ग्राहक सेवा) जैसा तो कुछ होता नहीं है, न ही कोई ईमेल या वेबसाइट जहाँ शिकायत दर्ज की जा सके। क्या आप यकीन कर सकते हैं कि इतनी बड़ी रीटेल चेन और उसकी अपनी कोई वेबसाइट नहीं!
core.nic.in पर दर्ज की मैंने शिकायत
"सबसे कम भरोसेमंद हैं रिलायंस की कंपनियाँ" : मिंट सर्वेक्षण

बुधवार, 7 जनवरी 2009

सत्यम शिवम् ... 'सुन्दरम'? फिलहाल तो नहीं!

राजू का झूठ खुलने के बाद 'सत्यम' ने अपना नाम बदल लिया है। नया नाम और लोगो पहले से ज़्यादा बदला नहीं है: