बुधवार, 21 जनवरी 2009

मेरी पहली फ़िल्म: यू, मी एंड डीवाईपीसी

बचपन से ही फ़िल्म डाइरेक्टर बनने का ख्वाब था, जो सिर्फ़ ख्वाब ही रहा। टाटा इंडिकॉम का ऐड देखा 'सुनो दिल की आवाज़'। सो मैंने सोचा दिल की आवाज़ सुनने का इससे अच्छा टाइम नहीं मिलेगा, रिसेशन का ज़माना है, कल को कंपनी निकाल दे तो कुछ तो और ऑप्शन रहना चाहिए न। सो जी मैं बन गया डाइरेक्टर! और प्रोड्यूसर, और राइटर, और कैमरा मैन , और एडिटर और वगैरह वगैरह...

वापिस ज़मीन पर आ जाओ। कुछ समय पहले आपको एक नयी साइट के बारे में बताया था न, DonateYourPC.in, तो उसी के प्रमोशन के लिए ये छोटा सा विडियो अपने ऑफिस के साथियों की मदद से बनाया। एक नज़र देखिये और अपनी राय ज़रूर दीजियेगा।

4 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

बहुत सुन्दर है, बधाई

---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम

रंजन ने कहा…

bahut aachchaa..

Udan Tashtari ने कहा…

ये तो बढ़िया बन गया. पास.

अब फीचर फिल्म बनाओ-मेरे लायक रोल देख लेना-समय निकाल कर आ जाऊँगा. :)

Amit ने कहा…

bahut sundar....