गुरुवार, 21 अगस्त 2008

कुछ बदला बदला सा है...

बचपन में हिन्दी में शब्दार्थ मुझे बड़े बोरिंग लगते थे। हर चैप्टर के बाद शब्दार्थ रटने पड़ते थे। वैसे मेरी हिन्दी काफ़ी अच्छी थी सो ज़्यादा समस्या नहीं होती थी। शिशिर जैसे लोग जिन्होंने 'चक्कर' को शुद्ध करके 'चक्र' लिखने के बजाय 'शक्कर' लिखा था, वो तो खैर थे ही अलग लीग में!

"कुछ के अर्थ समझ में आते हैं, कुछ के नहीं पर हर शब्द कुछ तो ज़रूर कहता है" और ऐसे ही कुछ शब्दों के साथ शुरू हुआ 'शब्दार्थ'। पता नहीं किसको क्या समझ में आया और क्या नहीं, किसको क्या बोरिंग लगा पर मैं कुछ न कुछ कहता ही रहा। मुझे अब भी समस्या नहीं हुई :)

पर कुछ न कुछ तो बदलना चाहिए ही, सो यह ब्लॉग भी बदल गया है। नाम बदल गया है, रंग रूप भी नया है पर शब्द वही रहेंगे क्यूंकि उन शब्दों को उगलने वाला मैं जो नहीं बदला!

यह नाम 'कभी यूँ भी तो हो' और इसके आगे लिखी पंक्ति मुझे ख़ास पसंद है। जगजीत सिंह के एक एल्बम 'सिलसिले' में एक ग़ज़ल है इसी शीर्षक से। इंटर के दिनों में विकास और मैं अपनी नज़र में सबसे बड़े संगीत विश्लेषक थे, यानी म्युज़िक रिव्यूअर। वो जगजीत सिंह का बड़ा भारी प्रशंसक था और हर कैसेट खरीदता था। मैं भी सुन लिया करता था। इस एल्बम को लेकर बड़ी बहस होती थी, मुझे सिर्फ़ यही एक ग़ज़ल पसंद आयी थी उस एल्बम से, और विकास यह सुनने को तैयार नहीं था कि जगजीत सिंह के एल्बम की बाकी गज़लें बकवास थी!

बहरहाल, वो दिन अभी भी झाड़ पोंछ के रखे हैं, कभी कभी देख लिया करता हूँ। इस ब्लॉग का नाम रखने की बात आयी तो यह पंक्तियाँ याद आ गयीं।

काफ़ी कुछ कह दिया, आपने काफ़ी कुछ सुन लिया। ठीक है, अब बताना कि नयी बोतल में पुरानी शराब कैसी लगी। वैसे कहते हैं कि शराब जितनी पुरानी होती है, उतना ही नशा चढ़ता है!

6 टिप्‍पणियां:

ubuntu ने कहा…

एक पुराना मौसम लौटा , याद भारी पूर्रवाई भी ... तुम्हारे ब्लॉग का शीर्षक पढ़ कर यादें ताज़ा हुई |

मुझे भी इस आल्बम की यह ग़ज़ल बेहद पसंद थी |
जीवन मे नयापन मुबारक हो|

Vaibhav ने कहा…

वाह अभिषेक जी, बहुत ही उच्चे दर्ज की बात लिखी है आपने ! मुबारक हो आपको नए थीम पर.

Udan Tashtari ने कहा…

नयी बोतल में पुरानी शराब

-मुबारक हो , Behtarin rang rogan ho gaya, ab niymit likhna shuru karen. :)

Praveen राठी ने कहा…

ह्म्म्म...
दो चीज़ें फिलहाल मुझे नदारद लग रही है: "तुम्हारी प्रोफाइल" और "पोस्ट के लेबल" |
बाकी बदलाव बेहतरीन है | और लिखते तो तुम हमेशा ही अच्छा हो | बधाई |

Praveen राठी ने कहा…

वैसे मुझे ब्लॉग का टाइटल भी नहीं दिखाई दिया, सिर्फ़ सब-टाइटल दिखाई पड़ रहा है | ये मेरी मशीन के साथ ही कोई दिक्कत है, या ये सब-टाइटल ही टाइटल का काम केरगा?
और "ब्लॉग स्वामी" की प्रोफाइल तो दिखनी ही चाहिए :)

अभिषेक ने कहा…

राठी साब .. प्रोफाइल के बारे में याद दिलाने के लिए बहुत शुक्रिया। 'ब्लॉग स्वामी' ने प्रोफाइल लगा दिया है। रही बात लेबल की, तो वो न तो इस पोस्ट में थे न इसके नीचे वाली में। इसी लिए नहीं दिखे, पुरानी पोस्ट में ज़रूर दिखते हैं। ब्लॉग का टाइटल इमेज है, और वो दिखाई दे रहा है, पता नहीं तुम्हारे कंप्यूटर पर क्यों नहीं आ रहा।

समीर भाई, पूरी कोशिश करूंगा कि नियमित रहूँ।
वैभव, प्रियांशु दोस्त बहुत धन्यवाद। वैसे वैभव, मैंने 'उच्चे दर्ज' की कौन सी बात कही??