शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

रिक्त

शब्द, आंसू और क्रोध अब कुछ नहीं बचा है इस मन में।
रिक्त हो गया है ये अब तो।
क्या कहूँ, किससे कहूं!
हर कन्धा तो आंसुओं से भीगा हुआ है।


(चित्र आभार )

शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

चढ़ते सूरज को सब सलाम करते हैं!

रीडिफ़.कॉम पर ये विज्ञापन देखा तो यही याद आया। आज जहाँ धोनी साब की फ़ोटो है कभी सचिन तेंदुलकर की होती थी। खैर...

रविवार, 9 नवंबर 2008

दान कीजिये अपने पुराने कंप्यूटर को

आपके पुराने कंप्यूटर से आपकी काफ़ी यादें जुड़ी होंगी लेकिन अब उन यादों पर सिर्फ़ धूल पड़ रही है और आप अपने लैपटॉप पर ही काम करते हैं, क्यूंकि उस पुराने कंप्यूटर में ना तो ज़रूरत के मुताबिक रैम है, न प्रोसेसर स्पीड। हार्ड डिस्क भी कम ही है और अब आप उस 800x600 के स्क्रीन को तो देख भी नहीं सकते।

क्यूँ नहीं आप इस पुराने साथी को किसी का नया साथी बना देते? यदि आप अपने पुराने कंप्यूटर को किसी गैर-सरकारी संस्था, किसी विद्यालय या अनाथाश्रम को दान करना चाहते हैं तो अब आप की सहायता के लिए एक नयी साईट आ गयी है: डोनेट योर पीसी.इन । जब आप किसी पुराने कंप्यूटर को दान करते हैं, तो न सिर्फ़ आप किसी की सहायता कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी एक योगदान कर रहे होते हैं। क्यूंकि पुराने कंप्यूटर को रिसाइकिल करना भी काफ़ी प्रदूषण फैलाता है।

इस समय ये साईट पुणे, बंगलोर और हैदराबाद में कार्यरत है। और हमें अन्य नगरों के लिए सहयोगियों की आवश्यकता है. तो यदि आप दान नहीं भी करना चाहते तो भी आप मदद कर सकते हैं। (कृपया यहाँ देखिये।)

एक ख़ास बात: ये साईट कोई एन. जी. ओ. नहीं है, लेकिन इसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। साईट के बारे में कोई भी प्रश्न/टिप्पणी आप यहाँ छोड़ सकते हैं या contact@donateyourpc.in पर भेज सकते हैं।

बुधवार, 1 अक्टूबर 2008

क्या इसी भारत पर गर्व है आपको?

ये ब्लॉग पढ़ने से पहले ज़रा रीडिफ़.कॉम पर इस लेख पर आयी हुई टिप्पणियों को पढ़िये, और फ़िर वापिस आइये।
अगर आपने पढ़ लिया तो सोच कर बताइये, ये कौन लोग हैं? क्या इसी हिंदुस्तान के हैं, इसी मिट्टी के जिससे आप और मैं निकले हैं? अगर हाँ तो मुझे तो अपने आप पर शर्म आ रही है, कि ऐसे लोगों को मुझे अपना देशवासी कहना पड़ रहा है!

सोच कितनी गिर सकती है, आदमी किस कदर घटिया हो सकता है, दिमाग में कचरा किस कदर भर सकता है ये जानना हो तो रीडिफ़.कॉम के किसी भी लेख पर टिप्पणियां पढ़ लीजिये। ऐसा लगता है जैसे इस देश में और इसके लोगों में सिर्फ़ नफरत ही भरी हो, एक दूसरे के प्रति। हर बात पर विवाद, हिंदू-मुस्लिम, उत्तर-दक्षिण, महिला-पुरूष और लगभग हर बात पर या बिना बात के ही! और विवाद भी सिर्फ़ मतभेद तक ही सीमित नहीं, एक दूसरे को अश्लील - अपशब्द कहना भी ज़रूरी।

आख़िर ये कौन लोग हैं जो रफ़ी साहब और महेंद्र कपूर साहब के लिए ऐसी बातें कह सकते हैं, मुझे तो नहीं समझ आ रहा। ये कैसे लोगों के बीच रह रहा हूँ मैं!

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

तुम से पूछूँ

'नज़र लगे न' की यह पंक्तियाँ दिल छू गयीं!

तुम से पूछूँ,
ख़ुद से पूछूँ
या दिल के अरमानों से
प्यार के लम्हे
अक्सर ही क्यूँ
आते हैं मेहमानों से

पास घड़ी भर को
रहते हैं
कल फ़िर आएँगे
कहते हैं!

ना पानी ना
ये हवा से
फ़िर जाने क्यूँ
बहते हैं!

('A Wednesday' फ़िल्म से)

गुरुवार, 11 सितंबर 2008

हिन्दी न्यूज़ चैनलों का नया यूज़

आज सुबह अखबारों में पढ़ा कि जेनेवा में बिग बैंग प्रयोग के बारे में इंडिया टीवी की ख़बर से एक १६ वर्षीया इतनी भयाक्रांत हुई कि दुनिया के अंत से पहले उसने अपने जीवन का अंत कर लिया दुखद ख़बर थी, दुःख हुआ

लेकिन अगर डर के आगे जीत है तो दुःख के आगे फायदा है!

आपने मनोज नाईट श्यामलन की 'द हैपनिंग' देखी है? इस फ़िल्म में प्रदूषण से त्रस्त हो कर पेड़ पौधे हवा में ऐसा रसायन छोड़ने लगते हैं कि लोगों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति जाग उठती है। अब देखिये इंडिया टीवी की खबरों में भी वही खासियत झलकने लगी है। ख़बर देख के लोग आत्महत्या करने लगते हैं। (मेरे घर में तो खैर ये चैनल आता नहीं, वरना ये ब्लॉग लिखने के लिए मैं जिंदा न रहता!)

अब सोचिये तो ये थर्ड डिग्री के लिए कैसा रहेगा? हवलदार चोर से कहेगा "बता कहाँ माल छुपा के रखा है वरना अभी इंडिया टीवी के आगे बिठा दूँगा", चोर झट से माल का पता बता देगा। पत्नी को नया हार चाहिए और पति ने नहीं दिलाया तो उसके घर आते ही इंडिया टीवी लगा देगी और पति को हार कर हार दिलाना ही पड़ेगा!

वैसे थर्ड डिग्री से थोड़ा नीचे सेकंड डिग्री का भी इंतजाम है। स्टार न्यूज़! इंडिया टीवी जितनी क्षमता तो खैर नहीं है इसमे लेकिन सर दर्द या पागलपन के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। मेहमान घर से नहीं टल रहे? सिंपल। टीवी पर स्टार न्यूज़ लगाइए फ़िर देखिये मेहमान भले ही फेविकोल का जोड़ लगा के बैठे हों, कैसे नहीं भागते!

कह नहीं सकता कि इससे पागलपन का इलाज सम्भव है या नहीं, एक प्रयोग यहाँ भी कर के देखा जाए.

ये आईडिया पेटेंट करवाना चाहिए, कल को ग़लत हाथों में पड़ गया तो दुःख ही दुःख रह जाएगा, फायदा किसी और को मिलेगा!

शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

बिहार बाढ़ त्रासदी: सहायता कैसे करें?

अब समय बड़ी बड़ी बातें करने का नहीं, बिहार की मदद करने का है, और वो भी जल्दी से जल्दी!

यदि आप बाढ़ पीड़ितों की सहायता करना चाहते हैं पर नहीं जानते कि स्वयं जाकर आप कहाँ और कैसे काम कर सकते हैं या ये नहीं समझ पा रहे कि सामान या धनराशि किसे और कैसे भेजें तो इस लिंक पर क्लिक कीजिये।

यदि आपके पास कोई और विकल्प या अच्छी जानकारी है जो ऊपर दिए गए लिंक से आपको नहीं मिली तो कृपया मुझे ज़रूर बताइये। यदि आप के शहर में ज़रूरी सामान एकत्रित किया जा रहा है बिहार भेजने के लिए तो मुझे ज़रूर बताएँ क्यूंकि कई लोग सामान देना चाहते हैं पर नहीं जानते कि उसे बिहार भेजा कैसे जाए।