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गुरुवार, 28 मई 2020

हम भूल जाएंगे

हम भूल जाएंगे 

रेलवे स्टेशन पर मरी हुई माँ 
को जगाता बच्चा,
सूटकेस पे सोते हुए 
खींचा जाता बच्चा,
ट्रेन में भूख प्यास और गर्मी 
से रो रो कर मर जाता बच्चा।
पर कल जब हमारे बच्चे 
स्कूल जाएंगे,
हम इन सबको भूल जाएंगे!


सैकड़ों मील पैदल 
चलते मज़दूर,
ट्रकों में बोरियों 
जैसे भरते मज़दूर,
ट्रेन के नीचे कट 
के मरते मज़दूर।
यकीन मानिये कल भी ये गलियों 
की धूल खाएंगे,
पर तब तक 
हम इन सबको भूल जाएंगे!


ठेकेदार से मज़दूरी के 
लिए गिड़गिड़ाती औरतें, 
छोटे बच्चे को गोद में 
ले के घर जाती औरतें,
सड़क पे प्रसव में ही 
मर जाती औरतें।
कल जब हम धूमधाम से 
महिला दिवस मनाएंगे,
कसम से कहता हूँ,
हम इन सबको भूल जाएंगे!
 
टीवी के आगे बैठ कर सरकार के 
महिमा गान सुनते हम,
कभी चीन, कभी पाकिस्तान 
कभी हिन्दू-मुसलमान सुनते हम, 
20 लाख करोड़ में 
अपना-अपना हिस्सा गिनते हम।
कौन सुनेगा अगर कभी 
अपने भी दिन ऐसे आएंगे,
पर पक्का है ऐसे ख़्याल भी
हमें नहीं जगाएंगे।
चार दिन में देख लेना ,
हम सब भूल जाएंगे। 
 
फिर एक बार,
हम सब कुछ भूल जाएंगे 
 

बुधवार, 21 सितंबर 2011

अथ श्री NEW महा भारत कथा

'माधव', 'केशव', 'वासुदेव' वगैरह के बाद जब अर्जुन ने 'यादव कुल गौरव' कह कर संबोधित किया तो कृष्ण झल्ला गए. "यार ये बाकी सब ठीक है पर 'यादव कुल गौरव' सुन के ऐसा लगता है जैसे यू.पी. का कोई समाजवादी  सभासद अखिलेश यादव को मस्का लगा रहा है."

अर्जुन का लटका मुंह और भी लटक गया. वैसे भी जबसे तीरंदाजी असोसिएशन का चुनाव हारे थे, अर्जुन को कोई पूछने वाला भी नहीं था. कृष्ण ने पहले भी समझाया था कि खेल असोसिएशन में तो किसी नेता की सिफारिश से भी काम नहीं चलने वाला, क्योंकि खुद सारे नेता इन खेल संस्थाओं के मुखिया हैं.

वैसे कृष्ण पर भी काफी प्रेशर था. मथुरा में जन्माष्टमी के लाइव कवरेज के लिए कई देशी विदेशी चैनल लाइन में थे लेकिन मुख्या प्रबंधक महोदय के भाई के साले के चचेरे भाई के चैनल को ही टेलीकास्ट राइट्स मिलेंगे ऐसी बात मीडिया में लीक हो गयी थी. अब अगर ये राइट्स पिछले बार से भी कम दामों पर गए तो वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी तो देवताओं के अनुअल गेट-टुगेदर में कृष्ण की इज्ज़त का चीरहरण कर देंगे!

ये लोग यही सब माथा पच्ची कर रहे थे कि भीम भी आ गए. चुनाव का सीज़न नहीं था सो उनके अखाड़े के पहलवानों की कोई डिमांड नहीं थी पर खिलाने पिलाने का खर्च तो था ही. कृष्ण ने उनको अर्जुन के दुःख के बारे में बताया तो भीम उल्टा अर्जुन पर ही बरस पड़े "अरे कृष्ण, मैंने भी तो इसको समझाया था. कुश्ती महासंघ और वेट लिफ्टिंग फेडरेशन के चुनावों में मेरे साथ क्या हुआ था, ये देख कर भी इसको अकल नहीं आयी तो कोई क्या करे. अरे ये सब छोड़ो मेरी सुनो. ये आजकल सारी दुनिया को जो अन्ना हजारे का गांधीगिरी का रोग लगा है ना, हम जैसों के पेट पे तो लात पड़ गयी. ना कोई लोन रिकवरी के लिए पहलवान ले रहा है ना घर खाली कराने के लिए. ये मुश्टंडे तो मेरे गले पड़ गए हैं."

तभी 'दुर्योधन भैया अमर रहें' और 'दुर्योधन तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं' के नारे लगाती ६-८ जीप और २०-२५ मोटर साइकिलों का एक काफिला धूल उड़ाता हुआ निकल गया. अर्जुन बोले 'साला काहे का संघर्ष. दलबदलू की औलाद. पहले मुलायम के आगे पीछे घूमता था, अब मायावती के पीछे.' भीम ने कहा, "यार समझ नहीं आया मायावती ने इसको ले कैसे लिया". कृष्ण बोले "अरे सीधा फंडा है भाई. इसके और इसके भाइयों के परिवार के इतने वोट हैं, इसकी सीट तो पक्की है ही."

इतना कहते हुए वो उठ खड़े हुए और बोले 'अच्छा मैं ज़रा निकलता हूँ. इंडिया टीवी में उनकी वो एलियन और गाय वाली स्टोरी थी ना, उस न्यूज़ पर पैनल डिस्कशन में जाना है." और उन्होंने अपनी स्प्लेंडर स्टार्ट की और निकल गए. 

अर्जुन और भीम दुर्योधन के काफिले की उड़ती हुई धूल देखते रह गए. 


गुरुवार, 11 सितंबर 2008

हिन्दी न्यूज़ चैनलों का नया यूज़

आज सुबह अखबारों में पढ़ा कि जेनेवा में बिग बैंग प्रयोग के बारे में इंडिया टीवी की ख़बर से एक १६ वर्षीया इतनी भयाक्रांत हुई कि दुनिया के अंत से पहले उसने अपने जीवन का अंत कर लिया। दुखद ख़बर थी, दुःख हुआ।

लेकिन अगर डर के आगे जीत है तो दुःख के आगे फायदा है!

आपने मनोज नाईट श्यामलन की 'द हैपनिंग' देखी है? इस फ़िल्म में प्रदूषण से त्रस्त हो कर पेड़ पौधे हवा में ऐसा रसायन छोड़ने लगते हैं कि लोगों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति जाग उठती है। अब देखिये इंडिया टीवी की खबरों में भी वही खासियत झलकने लगी है। ख़बर देख के लोग आत्महत्या करने लगते हैं। (मेरे घर में तो खैर ये चैनल आता नहीं, वरना ये ब्लॉग लिखने के लिए मैं जिंदा न रहता!)

अब सोचिये तो ये थर्ड डिग्री के लिए कैसा रहेगा? हवलदार चोर से कहेगा "बता कहाँ माल छुपा के रखा है वरना अभी इंडिया टीवी के आगे बिठा दूँगा", चोर झट से माल का पता बता देगा। पत्नी को नया हार चाहिए और पति ने नहीं दिलाया तो उसके घर आते ही इंडिया टीवी लगा देगी और पति को हार कर हार दिलाना ही पड़ेगा!

वैसे थर्ड डिग्री से थोड़ा नीचे सेकंड डिग्री का भी इंतजाम है। स्टार न्यूज़! इंडिया टीवी जितनी क्षमता तो खैर नहीं है इसमे लेकिन सर दर्द या पागलपन के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। मेहमान घर से नहीं टल रहे? सिंपल। टीवी पर स्टार न्यूज़ लगाइए फ़िर देखिये मेहमान भले ही फेविकोल का जोड़ लगा के बैठे हों, कैसे नहीं भागते!

कह नहीं सकता कि इससे पागलपन का इलाज सम्भव है या नहीं, एक प्रयोग यहाँ भी कर के देखा जाए.

ये आईडिया पेटेंट करवाना चाहिए, कल को ग़लत हाथों में पड़ गया तो दुःख ही दुःख रह जाएगा, फायदा किसी और को मिलेगा!