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गुरुवार, 28 मई 2020

हम भूल जाएंगे

हम भूल जाएंगे 

रेलवे स्टेशन पर मरी हुई माँ 
को जगाता बच्चा,
सूटकेस पे सोते हुए 
खींचा जाता बच्चा,
ट्रेन में भूख प्यास और गर्मी 
से रो रो कर मर जाता बच्चा।
पर कल जब हमारे बच्चे 
स्कूल जाएंगे,
हम इन सबको भूल जाएंगे!


सैकड़ों मील पैदल 
चलते मज़दूर,
ट्रकों में बोरियों 
जैसे भरते मज़दूर,
ट्रेन के नीचे कट 
के मरते मज़दूर।
यकीन मानिये कल भी ये गलियों 
की धूल खाएंगे,
पर तब तक 
हम इन सबको भूल जाएंगे!


ठेकेदार से मज़दूरी के 
लिए गिड़गिड़ाती औरतें, 
छोटे बच्चे को गोद में 
ले के घर जाती औरतें,
सड़क पे प्रसव में ही 
मर जाती औरतें।
कल जब हम धूमधाम से 
महिला दिवस मनाएंगे,
कसम से कहता हूँ,
हम इन सबको भूल जाएंगे!
 
टीवी के आगे बैठ कर सरकार के 
महिमा गान सुनते हम,
कभी चीन, कभी पाकिस्तान 
कभी हिन्दू-मुसलमान सुनते हम, 
20 लाख करोड़ में 
अपना-अपना हिस्सा गिनते हम।
कौन सुनेगा अगर कभी 
अपने भी दिन ऐसे आएंगे,
पर पक्का है ऐसे ख़्याल भी
हमें नहीं जगाएंगे।
चार दिन में देख लेना ,
हम सब भूल जाएंगे। 
 
फिर एक बार,
हम सब कुछ भूल जाएंगे 
 

सोमवार, 26 जुलाई 2010

बी जे पी की इतनी आलोचना क्यूँ होती है?

हिंदी ब्लॉगर जगत के प्रबुद्ध लोग अपनी बुद्धि लगाएं इसके पहले ही साफ़ कर दूं कि ना तो मैं बी जे पी का समर्थक हूँ और ना कांग्रेस का। बी जे पी की आलोचना होती है तो सही ही होती है, उनके 'सुकर्मों' का यही फल मिलना भी चाहिए। अभी ज्यादा विस्तार में जा कर हर एक मुद्दे की विवेचना नहीं करना चाहता, लेकिन बी जे पी की हाल की हरकतों, खासकर झारखंड, कर्नाटक और गुजरात के मुद्दों पर केंद्रीय नेतृत्व के रुख से कोई ज्यादा उम्मीदें नहीं जगतीं कि सरकार बनाने के बाद वो देश का कायाकल्प कर देंगे!

इस पोस्ट का मूल विषय ये है भी नहीं। बी जे पी की आलोचना कई बार सरकार को कठिन मुद्दों पर भी ठीक से ना घेर पाने की वजह से हुई है। आतंरिक कलह इसका एक कारण है, लेकिन दूसरा कारण भी ध्यान में रखना चाहिए। विपक्ष सरकार को तभी घेर सकता है जब वो एकजुट हो। बी जे पी की अगुवाई में विपक्ष का एकजुट होना लगभग असंभव है। मंहगाई के मुद्दे पर भारत बंद करने सारी पार्टियां आ ज़रूर गयी थीं, पर अगले ही दिन सब में क्रेडिट लेने की होड़ भी लग गयी थी ! बी जे पी अपनी विचारधारा की वजह से अलग पड़ जाती है तो इसमें पूरे विपक्ष की गलती है, सिर्फ बी जे पी को दोष देना गलत होगा।

दूसरी बात, राष्ट्रीय मीडिया अधिकतर सिर्फ कांग्रेस और बी जे पी को ही कवर करता है। कांग्रेस की आलोचना, सरकार की आलोचना के खाते में चली जाती है! दिग्विजय सिंह जब चिदंबरम पर कटाक्ष करते हैं तो ये कांग्रेस के अंतर्कलह नहीं, 'सरकार के अंतर्विरोध' होते हैं। वैसे भी चाटुकारों की इस जमात में जगनमोहन रेड्डी जैसे ज्यादा पात्र हैं नहीं। मैडम और राजकुमार तो युधिष्ठिर के रथ पर सवार हैं जो भूमि से २ इंच ऊपर चलता है। उनके बारे में कोई कुछ लिखता नहीं, क्यूँ कि शायद कोई ख़ास ज्यादा जानता ही नहीं, और जानकर न लिखने की वजह वो है जो मैं सोचता हूँ.

कई लोग इसमें 'स्यूडो सेकुलरिज्म' और 'राष्ट्रवाद' जैसे बड़े बड़े कारण खोजेंगे पर मुझे तो यही लगता है, कि वैसे भी सरकार के विरोध में मीडिया ज्यादा बोलता नहीं। याद कीजिये कि इसी मीडिया ने 'इंडिया शाइनिंग' जैसे विज्ञापन के आधार पर दोबर वाजपायी सरकार बनने की भविष्यवाणी कर दी थी.तब ये बी जे पी के समर्थन में कुछ भी बोलते थे , आज काँग्रेस के समर्थन में बोलते हैं. इसलिए बी जे पी की डगर थोड़ी और मुश्किल हो गई लगती है, लेकिन मीडिया की आलोचना, मत दाताओं के मन पर कितना प्रभाव डाल पाती है, ये देखने वाली बात होगी!

बुधवार, 1 अक्टूबर 2008

क्या इसी भारत पर गर्व है आपको?

ये ब्लॉग पढ़ने से पहले ज़रा रीडिफ़.कॉम पर इस लेख पर आयी हुई टिप्पणियों को पढ़िये, और फ़िर वापिस आइये।
अगर आपने पढ़ लिया तो सोच कर बताइये, ये कौन लोग हैं? क्या इसी हिंदुस्तान के हैं, इसी मिट्टी के जिससे आप और मैं निकले हैं? अगर हाँ तो मुझे तो अपने आप पर शर्म आ रही है, कि ऐसे लोगों को मुझे अपना देशवासी कहना पड़ रहा है!

सोच कितनी गिर सकती है, आदमी किस कदर घटिया हो सकता है, दिमाग में कचरा किस कदर भर सकता है ये जानना हो तो रीडिफ़.कॉम के किसी भी लेख पर टिप्पणियां पढ़ लीजिये। ऐसा लगता है जैसे इस देश में और इसके लोगों में सिर्फ़ नफरत ही भरी हो, एक दूसरे के प्रति। हर बात पर विवाद, हिंदू-मुस्लिम, उत्तर-दक्षिण, महिला-पुरूष और लगभग हर बात पर या बिना बात के ही! और विवाद भी सिर्फ़ मतभेद तक ही सीमित नहीं, एक दूसरे को अश्लील - अपशब्द कहना भी ज़रूरी।

आख़िर ये कौन लोग हैं जो रफ़ी साहब और महेंद्र कपूर साहब के लिए ऐसी बातें कह सकते हैं, मुझे तो नहीं समझ आ रहा। ये कैसे लोगों के बीच रह रहा हूँ मैं!

मंगलवार, 24 जून 2008

याहू और गूगल के भारत संस्करण, बड़े काम की चीज़!

ऑनलाइन सर्च के दिग्गजों के भारतीय संस्करण अपनी अलग पहचान बनाने लगे हैं।

याहू इंडिया सर्च में अब आप खोज के सभी परिणामों को एक पोर्टल के रूप में देख सकते हैं। यानी कि सारे हाइपर लिंक्स, फोटो और विडियो एक तरतीब से एक पेज में आ जाएंगे। उदहारण के लिए मैंने 'यूरो २००८' खोजा तो ये पेज आया:

यह सुविधा सिर्फ़ याहू भारत पर उपलब्ध है क्यूँ कि इसे याहू भारत ने बनाया है। आगे शायद इसे विश्व भर के लिए उपलब्ध कराया जाए।

याहू ने एक और सेवा शुरू की है जिससे आप अपने शहर से जुड़ी सारी खबरें, मौसम का हाल, यातायात मार्ग और याहू आन्सर्स के सवाल एक पोर्टल के रूप में देख सकते हैं। देखिये यहाँ।

गूगल ने अपनी फ़ोन सर्च सेवा भारत में शुरू कर दी है। मुझे बंगलोर के बारे में नहीं पता, पर हैदराबाद में आप इस कर-मुक्त संख्या: 1-800-41-999-999 पर काल कर सकते हैं और फ़िल्म शो, रेस्त्रां आदि के बारे में जानकारी पा सकते हैं। यह जानकारी आपको एस एम एस द्वारा भी भेजी जाती है। यह जानकारी ऑनलाइन आप गूगल लोकल पर देख सकते हैं ही!


तो इस पूरी कहानी का लब्बोलुआब यह कि, कभी कभी याहू भारत और गूगल भारत के दर्शन भी कर लिया कीजिये, काम की काफ़ी चीज़ें होती हैं यहाँ!