गुरुवार, 27 अगस्त 2009

ग्लोबल वार्मिंग

अब बारिश में
मेढक नहीं टरटराते।
रातों में जुगनू नहीं
जगमगाते.
आसमान भी अब स्लेटी सा है,
तारे भी नहीं दिखते अब
टिमटिमाते॥

अब पानी पड़ने पर
मिटटी नहीं महकती।
अब बालकनी में
सुबह गौरैया नहीं चहकती।

अब सर्दी
बस सर्दियों की छुट्टियों
जितनी होती है।
और गर्मी की छुट्टियाँ
गर्मियों का कोना पकड़
के रोती हैं।

अब पहाडों पर
बर्फ की चादर नहीं
बर्फ का रूमाल होता है,
ग्लोबल वार्मिंग का नहीं
आदमी के लालच का
ये कमाल होता है!

बुधवार, 12 अगस्त 2009

बदली

मद्धम स्लेटी, 
कितने सारे बादल
छाये हैं। 
अद्भुत 
मेरे सतरंगी सपने 
सब एक रंग में 
ही आए हैं! 

मद्धम स्लेटी से 
उन बादलों में, 
खोजता हूँ 
तुम्हारा चेहरा। 
वो शायद नाक है वहाँ 
और वो शायद आँखें 
जहाँ रंग है गहरा।। 

तस्वीर तुम्हारी ये हर पल 
बनती है, बिगड़ती है 
सुधरती है, संवरती है। 
शायद वैसे ही जैसे, 
मेरे मन में 
हर पल एक नयी 
छवि तुम्हारी 
घर करती है।। 

आँखें बंद करुँ 
सोचूँ तुम्हें, 
पर हंस देती हो तुम 
जैसे ही पास आती हो। 
क्यूँ तंग करती हो, 
हर बार 
सब रंग 
बिखेर जाती हो! 

वहाँ नभ में भी 
यही चला करता है 
तंग करना 
हँसना, खेलना। 
मत सताओ, 
शायद यही 
कहते होंगे हवा से 
ये मेघ ना!

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

माया का स्वयंवर

आम दिनों की तरह उस दिन भी करीब २६२७८ आई ए एस, आई पी एस, आई सी एस, आई एफ़ एस, पी सी एस, टी सी एस, एम एन एस वगैरह के तबादले करने और अपनी ६४८२३६ और कांशीराम की २ मूर्तियों की स्थापना के आदेश देने के बाद बहनजी को लगा कि एस पी, कांग्रेस, बी जे पी, आर जे डी, बी जे डी, आई एन एल डी, यू पी ए, एन डी ए, आई आर ए और देश विदेश की २३४७४७ पार्टियों की दिन रात की साजिशों से बचने और उनको मुंह तोड़ जवाब देने में उनको एक जीवन साथी की ज़रूरत है।

बहन जी ने आधुनिक भारत की एक अन्य वीरांगना (एक तो वो ख़ुद हैं ही) राखी सावंत से प्रेरणा लेते हुए, अपना स्वयंवर आयोजित करने की घोषणा कर दी।

बी एस पी ने इस दिन को 'शादी करो दिवस' के रूप में मनाने के निर्णय किया तो विपक्ष ने इसे 'सरकार को तलाक़ दो दिवस' के रूप में मनाया। तलाक़ के केस लड़ने वाले वकीलों ने विपक्ष की सराहना की तो विवाह के कारोबार से जुड़े उद्यमियों ने मायावती के शादी करने के निर्णय को देश की युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श की संज्ञा दी। लेकिन उनका उत्साह तब ठंडा पड़ गया जब मायावती ने उनसे ज़्यादा बकवास न करने और तुंरत ४० करोड़ रुपये के चेक भेज देने के लिए कहा।

राज्य के बी एस पी सांसदों और विधायकों को अपने अपने क्षेत्रों से नकद राशि जमा करने के आदेश दिए गए विपक्ष ने शोर मचाया कि सरकार जनता से ज़बरन वसूली कर रही है, लेकिन सतीश चंद्र मिश्रा ने मीडिया को समझाया कि जनता अपनी प्रिय मुख्यमंत्री को शगुन देना चाहती है और सरकार ऐसा करने में उनकी मदद कर रही है। उन्होंने ये भी कहा सभी नकद 'उपहार' आयकर से मुक्त होंगे, लेकिन उनके इस प्रस्ताव को आयकर विभाग ने खारिज कर दिया। इस पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि ये एक और प्रमाण है कि कांग्रेस उनकी हत्या करना चाहती है, दलितों का अपमान कर रही है और उत्तर प्रदेश के विकास में रोड़े अटका रही है.

आंबेडकर पार्क को सर्वसम्मति से स्वयंवर स्थल के लिए चुन लिया गया लेकिन क्यूंकि वहाँ कोई निवास स्थान नहीं है, इसलिए पी डब्लू डी को नजदीकी हॉस्टल को तोड़ कर होटल बनाने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका का जवाब देते हुए सरकार ने सफाई दी कि यह सरकारी खजाने का दुरुपयोग नहीं है बल्कि स्वयंवर के प्रचार और प्रसारण से जो धन एकत्रित होगा उससे मायावती की और बहुत सारी मूर्तियाँ लगाई जाएंगी जो राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देंगी। राज्य सरकार की तरफ़ से एक फ्रांसीसी मूर्तिकार ने बयान दिया कि मायावती की मूर्तियाँ बेहद लोकप्रिय हो रही हैं और बहुत ही जल्दी मोनालिसा को भी पीछे छोड़ देंगी।

सारी तैयारियों के बावजूद निर्धारित दिन स्वयंवर स्थल पर एक भी दूल्हे के नहीं पहुँचने से जहाँ चैनल, सरकार और मायावती की काफ़ी फजीहत हुई, वहीँ विपक्ष और मीडिया को सरकार की खिचाई करने का काफ़ी मसाला मिल गया।

इस पर टिप्पणी करते हुए मायावती ने कहा कि ये इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस उनकी हत्या करना चाहती है, दलितों का अपमान कर रही है और उत्तर प्रदेश के विकास में रोड़े अटका रही है। सरकार ने मामले की जांच के लिए सी बी आई को आदेश दे दिए हैं। वैसे जानकारों की मानें तो असल वजह थी स्वयंवर के नियम जिनके मुताबिक जिसे भी मायावती नापसंद करेंगी उसके विरुद्ध दलित उत्पीड़न एक्ट के अर्न्तगत गैर-ज़मानती वारंट जारी कर दिए जाएंगे और उसके घर को आग लगा दी जाएगी।

( यह पोस्ट अंग्रेज़ी में पढ़ें यहाँ )

शुक्रवार, 26 जून 2009

सीखना सिखाना

कल कनुप्रिया को पिंग किया, उनकी माता जी के ब्लॉग का लिंक पूछने के लिए। इस माँ बेटी की जोड़ी की कहानी अपने आप में प्रेरणास्पद है.

एक हादसे में परिवार के एक सदस्य के असमय निधन के बाद जब आंटी की हिम्मत टूटने लगी थी, कनुप्रिया ने उनको एक बार फ़िर एक दिशा दी। उनको कंप्यूटर का इस्तेमाल कर के हिन्दी में लिखना सिखाया। शुरू में तो थोड़ा विरोध था,"क्या होगा लिख के" और "रहने दो... मुझे कुछ नहीं सीखना है" जैसी बातें, लेकिन जब एक इन्टरनेट पत्रिका में २ कविताएँ छप गयीं, तो यह शुरूआती बैरियर हट गया। (इसके बारे में पढ़िये कनुप्रिया की लेखनी में!)

आंटी ने न सिर्फ़ हिन्दी में लिखना सीखा, अब उनका अपना ब्लॉग भी है।

तो बस यही कह रहा था में कनुप्रिया से कि आंटी की तारीफ़ करनी पड़ेगी कि उनमें सीखने का उत्साह है। इतनी जटिल चीज़ सीख रही हैं। एक मेरे पिता जी हैं कि उनको मोबाइल में एड्रेस बुक तक यूज़ करना नहीं आता, इतनी बार सिखाने की कोशिश की लेकिन वो सीखना ही नहीं चाहते।

तभी ये बात दिमाग में आयी, कि आज हम अपने माँ-बाप के बारे में वही कह रहे हैं जो कल कुछ साल पहले तक वो हमसे कहा करते थे "राहुल को देखो कितनी मेहनत करता है, और तुम हो बिल्कुल कोशिश भी नहीं करते हो।" कोशिश नहीं करोगे तो कैसे सीखोगे!"वगैरह वगैरह ...

वक़्त कैसे बदल जाता है न! आज हम जहाँ हैं, कल वहाँ हमारे माता-पिता थे और कल हमारे बच्चे होंगे। कल हमने जो कुछ सीखा था, कल हमसे कोई और सीखेगा और हम किसी और से कुछ और सीखेंगे!

और बस ज़िन्दगी का ये क्रम यूँ ही चलता रहेगा!

गुरुवार, 25 जून 2009

वर्षा जल संग्रहण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करने की विधि

अभी कुछ महीने पहले अपनी कंपनी और स्वयंसेवी संस्था प्रेमालयम के साथ मिलकर, हैदराबाद के एक प्राइमरी स्कूल में एक मध्यम क्षमता का रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया। इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है, निर्माण का तरीका और कितना खर्चा आता है इसकी पूरी जानकारी मैंने अपने ब्लॉग के ज़रिये देने की कोशिश की है।
ये पोस्ट आप यहाँ (अंग्रेज़ी) देख सकते हैं। कोई और जानकारी चाहें तो भी बेहिचक पूछियेगा!

शनिवार, 16 मई 2009

चुनाव परिणाम : जवाब के बाद अब सवाल

समय: १२.३७ अपरान्ह, १६ मई २००९

५४३ सीटों के नतीजे और रुझान आ चुके हैं और लगभग सब ने मान लिया है कि फ़िर से 'सिंह इज किंग'। अब मेरे दिमाग में कुछ सवाल आने शुरू हो गए हैं:

१) मायावती का क्या होगा? उत्तर प्रदेश में अब वो हस्ती नहीं रही बहन जी की। कांग्रेस और एस.पी. ने बी.एस.पी. को झटका दिया है। मायावती के प्रधान मंत्री बनने के सपने अब उत्तर प्रदेश के सहारे तो पूरे होने से रहे। बाकी राज्यों में अभी भी हैसियत 'स्पॉयलर' से ज़्यादा नहीं है। तो अब बहन जी का राजनैतिक कद कितना बढ़ेगा या घटेगा?

२) बी.जे.पी. क्या फ़िर से २००४ वाली हालत में चली जाएगी? २००४ में हार ने पार्टी का आत्मविश्वास लगभग ख़त्म कर दिया था और अगले ३ साल तक वो इस सदमे से उबार नहीं पायी। इस बार तो और भी बुरा प्रदर्शन रहा है और अब तो आडवानी भी शायद इस्तीफा दे देंगे। तो अब बी.जे.पी. की दूसरी पंक्ति के नेता पार्टी को किस और ले जाएंगे?

३) क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का पुनर्जन्म होगा? या ये सिर्फ़ एक चमक भर है? कांग्रेस ने कल्पना से भी बेहतर नतीजे दिए हैं यू पी में। क्या कांग्रेस इस जीत का फायदा उठा सकेगी या फ़िर एक बार फ़िर अच्छी शुरुआत को गँवा देगी?

४) आडवाणी जी का क्या होगा? क्या आडवाणी शेन वार्न बन गए हैं जिनके लिए कहा जाता है कि वो ऑस्ट्रेलिया के सर्वश्रेष्ठ कप्तान थे जिसने कभी कप्तानी नहीं की? और कितने साल वो सक्रिय राजनीति में रहेंगे?

अगर आपको जवाब मालूम हैं तो कृपया बताइये!

(देखिये मेरी 'मिलिनेयर टू स्लमडॉग' लिस्ट यहाँ)