बुधवार, 8 अप्रैल 2009
सोमवार, 30 मार्च 2009
क्या मीडिया वाकई पक्षपाती है?
एन डी टी वी इंडिया पर एक चर्चा में अगर ज़िक्र नहीं आता तो मुझे तो शायद इस घटना का पता भी नहीं चलता। (मालूम नही कि आपको पता है कि नहीं!) चुनाव आयोग ने कोंग्रेस के इमरान किदवई को एक चुनाव सभा में धार्मिक मुद्दे पर बोलने के लिए नोटिस जारी किया है। किदवई साहब ने इस भाषण में कहा कि अगर वो मुफ्ती होते तो फतवा जारी कर देते कि मुस्लिमों के लिए बी जे पी को वोट देना 'कुफ्र' के बराबर है।
मुझे आश्चर्य है कि इस घटना को मीडिया ने लगभग नज़रंदाज़ कर दिया है। हलाँकि व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि यह भाषण वरुण गाँधी के भाषण के मुकाबले कुछ भी नहीं है और न इसमे किसी अन्य धर्म के विरुद्ध कोई बात कही गयी है और सबसे बड़ी बात किदवई साहब के नाम में 'गांधी' नहीं है! लेकिन कोई भी दलील इस बात को नहीं झुठला सकती कि मीडिया ने इमरान किदवई और कोंग्रेस को लगभग क्लीन चिट दे दी है।
ये बात छोटी लग सकती है लेकिन फ़िर मीडिया हिन्दुओं के विरूद्ध पक्षपात के आरोपों से बच नहीं सकता।
मुझे आश्चर्य है कि इस घटना को मीडिया ने लगभग नज़रंदाज़ कर दिया है। हलाँकि व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि यह भाषण वरुण गाँधी के भाषण के मुकाबले कुछ भी नहीं है और न इसमे किसी अन्य धर्म के विरुद्ध कोई बात कही गयी है और सबसे बड़ी बात किदवई साहब के नाम में 'गांधी' नहीं है! लेकिन कोई भी दलील इस बात को नहीं झुठला सकती कि मीडिया ने इमरान किदवई और कोंग्रेस को लगभग क्लीन चिट दे दी है।
ये बात छोटी लग सकती है लेकिन फ़िर मीडिया हिन्दुओं के विरूद्ध पक्षपात के आरोपों से बच नहीं सकता।
शनिवार, 21 मार्च 2009
जैसे हम, वैसे हमारे नेता
चलो अब मेनका गांधी खुश होंगी। इतने साल से बेटे का कैरियर बनाने में लगी थीं, कुछ हो नहीं रहा था। कोई नाम तक नहीं जानता था।
लेकिन अब घर घर में बेटा चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। राजनीति में सही तरीके से अब पदार्पण हुआ है। भड़काऊ भाषण बाज़ी, पकड़े जाने पर झूठ बोलना और फ़िर हिंदुत्व का सहारा लेकर ख़ुद को बेक़सूर साबित करना। बी जे पी के पास इतने दिन से कोई युवा नेता नहीं था, चलो अब एक तो मिल गया।
टी.वी चैनल भले ही भाषण पर आँखें तरेर रहे हों लेकिन, लगातार कवरेज़ कर के उन्होंने एक और नरेन्द्र मोदी पैदा कर दिया। अभी ही हिंदुस्तान टाइम्स में पढ़ा कि पीलीभीत की जनता का ध्रुवीकरण (पोलराईजेशन) हो चुका है, जैसे मोदी साहब ने गुजरात का किया है। ibnpolitics.com पर एक समय जहाँ इन 'नेता जी' का प्रोफाइल तक नहीं था, अब ५०००० से ज़्यादा लोगों ने उनको वोट किया है (लगभग २५००० उनको पसंद करते हैं और लगभग १६००० नापसंद)। शायद यही वजह थी कि पहले तो हो-हल्ले से घबरा कर पार्टी ने ख़ुद को भाषण और भाषण देने वाले से अलग रखने की कोशिश की लेकिन वो बहुत जल्दी समझ गए कि 'बदनाम भी होंगे तो क्या नाम न होगा' और तुरंत ही इन श्रीमान को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया!
जो लोग इनको पसंद करते हैं वो इनके भाषण को भूल कर इनकी प्रेस कांफ्रेंस में कही गयी बातों को तवज्जो देते हैं। ये हिंदू हैं, भारतीय हैं और गांधी हैं। सबसे बड़ी बात कि नेता हैं। इनकी कही हर बात को सुनाने दिखने के लिए १५० चैनल और ५० अखबार हैं और बेवकूफ बनकर आपस में लड़ मरने के लिए ११० करोड़ हिन्दुस्तानी। अभी ४ महीने पहले ही २६/११ के बाद हम सबने कसमें खाई थीं कि अब जाति-धर्म नाम पर नहीं लडेंगे, एक रहेंगे और ऐसे नेताओं को और ऐसी बंटवारे की राजनीति को ख़त्म करेंगे। और अब हम 'पढ़े-लिखे' कल्चर्ड लोग फ़िर से कठपुतली बन कर नाचने को तैयार हैं।
किस मुंह से नेताओं को गाली देते हैं हम जब हम ख़ुद ही ऐसी दोगली बातें करते हैं।
नेता जी की जेल यात्रा: बेल की अर्जी, शहादत का अंदाज़!
लेकिन अब घर घर में बेटा चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। राजनीति में सही तरीके से अब पदार्पण हुआ है। भड़काऊ भाषण बाज़ी, पकड़े जाने पर झूठ बोलना और फ़िर हिंदुत्व का सहारा लेकर ख़ुद को बेक़सूर साबित करना। बी जे पी के पास इतने दिन से कोई युवा नेता नहीं था, चलो अब एक तो मिल गया।
टी.वी चैनल भले ही भाषण पर आँखें तरेर रहे हों लेकिन, लगातार कवरेज़ कर के उन्होंने एक और नरेन्द्र मोदी पैदा कर दिया। अभी ही हिंदुस्तान टाइम्स में पढ़ा कि पीलीभीत की जनता का ध्रुवीकरण (पोलराईजेशन) हो चुका है, जैसे मोदी साहब ने गुजरात का किया है। ibnpolitics.com पर एक समय जहाँ इन 'नेता जी' का प्रोफाइल तक नहीं था, अब ५०००० से ज़्यादा लोगों ने उनको वोट किया है (लगभग २५००० उनको पसंद करते हैं और लगभग १६००० नापसंद)। शायद यही वजह थी कि पहले तो हो-हल्ले से घबरा कर पार्टी ने ख़ुद को भाषण और भाषण देने वाले से अलग रखने की कोशिश की लेकिन वो बहुत जल्दी समझ गए कि 'बदनाम भी होंगे तो क्या नाम न होगा' और तुरंत ही इन श्रीमान को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया!
जो लोग इनको पसंद करते हैं वो इनके भाषण को भूल कर इनकी प्रेस कांफ्रेंस में कही गयी बातों को तवज्जो देते हैं। ये हिंदू हैं, भारतीय हैं और गांधी हैं। सबसे बड़ी बात कि नेता हैं। इनकी कही हर बात को सुनाने दिखने के लिए १५० चैनल और ५० अखबार हैं और बेवकूफ बनकर आपस में लड़ मरने के लिए ११० करोड़ हिन्दुस्तानी। अभी ४ महीने पहले ही २६/११ के बाद हम सबने कसमें खाई थीं कि अब जाति-धर्म नाम पर नहीं लडेंगे, एक रहेंगे और ऐसे नेताओं को और ऐसी बंटवारे की राजनीति को ख़त्म करेंगे। और अब हम 'पढ़े-लिखे' कल्चर्ड लोग फ़िर से कठपुतली बन कर नाचने को तैयार हैं।
किस मुंह से नेताओं को गाली देते हैं हम जब हम ख़ुद ही ऐसी दोगली बातें करते हैं।
नेता जी की जेल यात्रा: बेल की अर्जी, शहादत का अंदाज़!
गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009
वैलेंटाइन डे और प्रमोद मुतालिक के बन्दर!
अब तक आपने 'पिंक चड्ढी कैम्पेन' के बारे में तो सुना/पढ़ा होगा ही, कईयों ने तो कुछ पिंक न सही लाल पीली भेज भी दी होंगी। आज पता चला कि श्री राम सेना चड्डियों के बदले साड़ियाँ भेज रही है।
मैं तो कहता हूँ कि इस साल ५-६ बार वैलेंटाइन डे मना लेते हैं, देश का ज़बरदस्त तरीके से भला होगा! कैसे?
अब देखो देश भर में राम सेना के लिए अंतर्वस्त्र खरीदे जाएंगे, हजारों की संख्या में। राम सेना साड़ियाँ खरीदेगी, फ़िर से हजारों की संख्या में। टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग के हुए न वारे न्यारे! अब ये सब सामान भेजा जाना है तो उसके लिए कुरियर कंपनियों की ज़रूरत पड़ेगी। इतना सामान, सोचो कितना पैसा!
ये तो हुआ डाइरेक्ट वाला फायदा, इनडाइरेक्ट वाला और भी लंबे समय तक चलने वाला है।
श्री राम सेना ने कहा कि अगर जोड़ों को पकड़ा गया तो शादी करा देंगे। शादी तो इस देश का सबसे बड़ा रिसेशन प्रूफ़ धंधा है। २ लोग शादी करते हैं, २००० लोगों की रोजी चलती है! (वैसे कहीं ये शादी वाला एंगल शादी बिजनेस वालों के कहे पर तो नहीं लाया गया है? देखना पड़ेगा।) लेकिन मैरेज ब्यूरो और शादी वाली वेबसाइट्स के पेट पर तो लात पड़ेगी।
वैसे एक ज़बरदस्त आईडिया। अगर आपका परिवार आपकी प्रेमिका या प्रेमी को पसंद नहीं करता और आपके 'बाबूजी' ने कह दिया है कि "उस घर में तेरी डोली (या तेरी घोड़ी!) उनकी लाश पर ही चल कर जाएगी" तो इस दिन बिंदास अपने प्रेमी/प्रेमिका के साथ निकल जाइए और पूरी कोशिश कीजिये कि आप इन बंदरों, मेरा मतलब है राम सैनिकों (अब राम की सेना में तो बन्दर ही थे न) की नज़र में आ जाइए। बस बाबूजी की लाश का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं!
(वैसे प्रमोद मुतालिक और उनके बन्दर किसी जंगल में ही रहें तो बेहतर है। न तो हमारे शहरों में इनके लिए जगह हो और न ही हमारे मन में!)
पढ़ें मंगलौर घटना के असली हीरो के बारे में। क्या आप पवन शेट्टी को जानते हैं?
मैं तो कहता हूँ कि इस साल ५-६ बार वैलेंटाइन डे मना लेते हैं, देश का ज़बरदस्त तरीके से भला होगा! कैसे?
अब देखो देश भर में राम सेना के लिए अंतर्वस्त्र खरीदे जाएंगे, हजारों की संख्या में। राम सेना साड़ियाँ खरीदेगी, फ़िर से हजारों की संख्या में। टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग के हुए न वारे न्यारे! अब ये सब सामान भेजा जाना है तो उसके लिए कुरियर कंपनियों की ज़रूरत पड़ेगी। इतना सामान, सोचो कितना पैसा!
ये तो हुआ डाइरेक्ट वाला फायदा, इनडाइरेक्ट वाला और भी लंबे समय तक चलने वाला है।
श्री राम सेना ने कहा कि अगर जोड़ों को पकड़ा गया तो शादी करा देंगे। शादी तो इस देश का सबसे बड़ा रिसेशन प्रूफ़ धंधा है। २ लोग शादी करते हैं, २००० लोगों की रोजी चलती है! (वैसे कहीं ये शादी वाला एंगल शादी बिजनेस वालों के कहे पर तो नहीं लाया गया है? देखना पड़ेगा।) लेकिन मैरेज ब्यूरो और शादी वाली वेबसाइट्स के पेट पर तो लात पड़ेगी।
वैसे एक ज़बरदस्त आईडिया। अगर आपका परिवार आपकी प्रेमिका या प्रेमी को पसंद नहीं करता और आपके 'बाबूजी' ने कह दिया है कि "उस घर में तेरी डोली (या तेरी घोड़ी!) उनकी लाश पर ही चल कर जाएगी" तो इस दिन बिंदास अपने प्रेमी/प्रेमिका के साथ निकल जाइए और पूरी कोशिश कीजिये कि आप इन बंदरों, मेरा मतलब है राम सैनिकों (अब राम की सेना में तो बन्दर ही थे न) की नज़र में आ जाइए। बस बाबूजी की लाश का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं!
(वैसे प्रमोद मुतालिक और उनके बन्दर किसी जंगल में ही रहें तो बेहतर है। न तो हमारे शहरों में इनके लिए जगह हो और न ही हमारे मन में!)
पढ़ें मंगलौर घटना के असली हीरो के बारे में। क्या आप पवन शेट्टी को जानते हैं?
बुधवार, 21 जनवरी 2009
मेरी पहली फ़िल्म: यू, मी एंड डीवाईपीसी
बचपन से ही फ़िल्म डाइरेक्टर बनने का ख्वाब था, जो सिर्फ़ ख्वाब ही रहा। टाटा इंडिकॉम का ऐड देखा 'सुनो दिल की आवाज़'। सो मैंने सोचा दिल की आवाज़ सुनने का इससे अच्छा टाइम नहीं मिलेगा, रिसेशन का ज़माना है, कल को कंपनी निकाल दे तो कुछ तो और ऑप्शन रहना चाहिए न। सो जी मैं बन गया डाइरेक्टर! और प्रोड्यूसर, और राइटर, और कैमरा मैन , और एडिटर और वगैरह वगैरह...
वापिस ज़मीन पर आ जाओ। कुछ समय पहले आपको एक नयी साइट के बारे में बताया था न, DonateYourPC.in, तो उसी के प्रमोशन के लिए ये छोटा सा विडियो अपने ऑफिस के साथियों की मदद से बनाया। एक नज़र देखिये और अपनी राय ज़रूर दीजियेगा।
वापिस ज़मीन पर आ जाओ। कुछ समय पहले आपको एक नयी साइट के बारे में बताया था न, DonateYourPC.in, तो उसी के प्रमोशन के लिए ये छोटा सा विडियो अपने ऑफिस के साथियों की मदद से बनाया। एक नज़र देखिये और अपनी राय ज़रूर दीजियेगा।
रविवार, 11 जनवरी 2009
ऐसे ठगता है रिलायंस फ्रेश!
दो-तीन दिन पहले अपने नजदीकी रिलायंस फ्रेश स्टोर में सब्जी लेने गया था। और वहाँ पर पैक्ड गोभी के एक पैकेट पर नज़र पड़ी और ठहर गयी। २ और पैकेट पड़े थे उनको भी उठाकर देखा और सारा खेल समझ में आ गया।
हर पैकेट पर लगे लेबल को इस तरह से फाड़ दिया गया था कि उसकी 'बेस्ट बिफ़ोर डेट' (यानी कब तक प्रयोग के लिए सुरक्षित है) नहीं पढ़ी जा सके। मैंने उसी समय कुछ फ़ोटो खीच लिए:


स्वयं ही देखिये। मैंने स्टोर के स्टाफ से इस बारे में पूछा लेकिन उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। वैसे भी रिलायंस फ्रेश में कस्टमर केयर (ग्राहक सेवा) जैसा तो कुछ होता नहीं है, न ही कोई ईमेल या वेबसाइट जहाँ शिकायत दर्ज की जा सके। क्या आप यकीन कर सकते हैं कि इतनी बड़ी रीटेल चेन और उसकी अपनी कोई वेबसाइट नहीं!
core.nic.in पर दर्ज की मैंने शिकायत
"सबसे कम भरोसेमंद हैं रिलायंस की कंपनियाँ" : मिंट सर्वेक्षण
हर पैकेट पर लगे लेबल को इस तरह से फाड़ दिया गया था कि उसकी 'बेस्ट बिफ़ोर डेट' (यानी कब तक प्रयोग के लिए सुरक्षित है) नहीं पढ़ी जा सके। मैंने उसी समय कुछ फ़ोटो खीच लिए:



स्वयं ही देखिये। मैंने स्टोर के स्टाफ से इस बारे में पूछा लेकिन उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। वैसे भी रिलायंस फ्रेश में कस्टमर केयर (ग्राहक सेवा) जैसा तो कुछ होता नहीं है, न ही कोई ईमेल या वेबसाइट जहाँ शिकायत दर्ज की जा सके। क्या आप यकीन कर सकते हैं कि इतनी बड़ी रीटेल चेन और उसकी अपनी कोई वेबसाइट नहीं!
core.nic.in पर दर्ज की मैंने शिकायत
"सबसे कम भरोसेमंद हैं रिलायंस की कंपनियाँ" : मिंट सर्वेक्षण
बुधवार, 7 जनवरी 2009
सत्यम शिवम् ... 'सुन्दरम'? फिलहाल तो नहीं!
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